जानिए बाबा हरदेव की दस बातें

नई दिल्ली/ खुशहाल सिंह। निरंकारी समुदाय की शुरुआत पंजाब के उत्तर-पश्चिम में बसे रावलपिंडी से हुई जो अब पाकिस्तान में हैं। इस समुदाय की स्थापना सहजधारी सिख बाबा दयाल सिंह और एक सोने के कारोबारी ने की थी। ब्रिटिश राज में हालांकि इस समुदाय को दरकिनार कर दिया गया। बाद में 1929 में संत निरंकारी मिशन की शुरुआत हुई। आज देश ही नहीं विदेशों में भी निरंकारी संप्रदाय के करोड़ों भक्त हैं। बाबा ने अपने पिता गुरबचन सिंह की मौत के बाद मिशन के प्रमुख का पद संभाला था।

बाबा हरदेव सिंह की दस बातें

1- बाबा हरदेव सिंह का जन्म 23 फरवरी 1954 को दिल्ली में हुआ था।

2- उन्होंने वर्ष 1980 में पिता की मौत के बाद निरंकारी मिशन के प्रमुख का पदभार संभाला था। उन्हे सतगुरु की उपाधि दी गई थी।

3- निरंकारी मिशन की 27 देशों में 100 से ज्यादा शाखाएं हैं जो मानव कल्याण कार्यों में सक्रिय है।

4- 1971 में उन्होंने निरंकारी सेवा दल में सेवा का काम शुरू किया।

5- 1929 में संत निरंकारी मिशन की स्थापना हुई थी। निरंकारी समुदाय की उत्पत्ति पंजाब के उत्तर-पश्चिम में बसे रावलपिंडी से हुई जो अब पाकिस्तान में है।

6- बाबा हरदेव सिंह को बाबा भोला के नाम से भी जाना जाता था।

7-  बाबा ने 1975 में उन्होंने फर्रुखाबाद की सविंदर कौर से विवाह किया। सविंदर कौर निरंकारी संत समागम की सदस्य थीं।

8- बाबा बूटा सिंह ने निरंकारी मिशन की स्थापना की थी।

9-  निरंकारी बाबा हरदेव सिंह के अनुसार व्यक्ति धर्म के नाम पर आपस में बंटता जा रहा है वह अपनी पहचान खोता जा रहा हैं।

10- बाबा हरदेव के पिता का नाम गुरबचन सिंह और माता का नाम कुलवंत कौर है।