न्यायपूर्ण, समता मूलक व्यवस्था ही राम राज्य है – आचार्य लोकेश

मुंबई। ऊर्जा फाउंडेशन द्वारा मुम्बई के दादर में आयोजित ‘राम राज्य’ कार्यक्रम में अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य डा. लोकेश मुनि को ऊर्जा रत्न अवार्ड से सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री सुब्रह्मनियम स्वामी, आचार्य कुशाग्र नंदी जी, श्री अरिहंत ऋषि जी ने सम्मानित किया गया |

श्री सुब्रह्मनियम स्वामी ने कहा की मुझे विश्वास है कि कोर्ट का फैसला हमारे हक में आएगा और अगली दिवाली हम अयोध्या के राम मंदिर में मनाएंगे | उन्होंने कहा राम मंदिर के लिए अलग कानून लाने की जरूरत नहीं है |  पूर्व में यह तय हो चुका है कि यदि यह सिद्ध हो जाता है कि उस स्थान पर कभी राम मंदिर था तो जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दे दी जाएगी |

आचार्य लोकेश मुनि ने इस अवसर पर कहा कि जब राजनीति धर्म से प्रभावित होगी तभी राम राज्य की स्थापना होगी | राम राज्य का अर्थ है जहाँ पर न्यायपूर्ण, समता मूलक व्यवस्था हो | अनुशासन, मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा हो | जीवन में त्याग, संयम, आदर, भाईचारे का भाव हो | सभी के पास विकास के सामान अवसर हो |  बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर हो और महिलाओं का सम्मान हो | समाज में अर्थ और काम के पीछे अंधी दौड़ न होकर कर्तव्य, धर्म और मोक्ष की कामना हो | समाज में ऊंच नीच का भेद भाव न हो, मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने स्वयं शबरी के झूठे बेर खाए थे |

आचार्य कुशाग्र नंदी जी ने कहा कि अध्यात्म और राजनीति के समन्वय से ही राम राज्य की स्थापना हो सकती है| राजनीति को धर्म और नैतिकता से अलग नहीं किया जा सकता | उन्होंने कहा कि जब राजनेता और अध्यात्मिक गुरु समाज के विकास और कल्याण की बात करेंगे तो निश्चिर रूप से यह राम राज्य की और एक कदम होगा |

श्री अरिहंत ऋषि जी ने कहा कि आचार्य लोकेश ने समाज में शांति और सद्भावना के लिए न सिर्फ भारत में अपितु विश्व में उल्लेखनीय योगदान दिए है | विश्व धर्म संसद, संयुक्त राष्ट्र संघ, यु.के. पार्लियामेंट जैसे प्रतिष्ठित मंचो को संबोधित कर उन्होंने भारतीय संस्कृति को गौरान्वित किया है | उनको सम्मानित कर आज मंच स्वयं सम्मानित हो रहा है |