कालसर्प दोष निवारण के लिए नागपंचमी ऐसे करें ये उपाय 

नाग पंचमी कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए बेहद खास माना गया है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन मिलता है कि नाग पंचमी के दिन कुछ उपायों से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। महर्षि पाराशर और वाराह मिहिर के ज्योतिष शास्त्रों में भी काल सर्प दोष का वर्णन मिलता है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार मनुष्य के ग्रह नक्षत्र जब एक स्थान पर एकत्र हो जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति काल सर्प दोष से पीड़ित बताया जाता है। इस दोष से पीडि़त व्यक्ति को नागपंचमी के दिन पूजा करने से लाभ होना बताया जाता है। मान्यता है कि इस दिन नाग को दूध पिलाने से जल्द ही कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
कालसर्प दोष निवारण के लिए नागपंचमी ऐसे करें ये उपाय 
नागपंचमी के दिन ही शिव मंदिर में 1 माला शिव गायत्री मंत्र का जाप (यथाशक्ति) करें एवं नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाएं तो पूर्ण लाभ मिलेगा। शिव गायत्री मंत्र  ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे, महादेवाय धीमहि तन्नोरुद्र: प्रचोदयात्।’
नागपंचमी के अलावा आम दिनों में भी कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय किए जा सकते हैं। विशेषकर सोमवार को शिव मंदिर में जो जातक चंदन की अगरबत्ती लगाकर एवं तेल या घी का दीपक लगाकर शिव गायत्री मंत्र का जाप करता है, तो उसे अवश्य ही श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है।
नागों की राजधानी भोगवतीपुर
शास्त्रों के अनुसार नागों की राजधानी भोगवतीपुर दर्शाया गया है। यह बस्तर अंचल का वर्तमान बारसूर है। बताया जाता है कि अर्जुन ने नाग जाति की राजकुमारी उलुपी से विवाह की, जो छत्तीसगढ़ अंचल की थी।
नागवंशीय परंपरा
अंचल में नागवंशों के राज के अनेक प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने अंचल के अनेक स्थलों पर शिव मंदिरों का निर्माण कराया। इनके द्वारा निर्मित शिव मंदिर वास्तु और विभिन्न कलाओं से युक्त हैं। छत्तीसगढ़ में नागों के दो वंशों की राजधानी बस्तर और कवर्धा में रही। भोरमदेव का ऐतिहासिक शिव मंदिर नाग राजाओं द्वारा ही निर्मित है।