अपने समाज को नमाज के साथ जोड़ें और नमाज को समाज के साथ जोड़े – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं स्वामी अग्निवेश जी ने इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली में आयोजित विश्व वेद सम्मेलन के आज दूसरे दिन मुस्लिम मातृ शक्तियों को विश्व वेद सम्मेलन में सहभाग करने के लिये उनका अभिनन्दन किया और कहा कि मानव की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यह एकता का संदेश है इस मंच से कि आज भारत का युवा बदलाव चाहता है।

स्वामी जी ने मुस्लिम मातृ शक्तियों को रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये कहा कि आपसी दरारों को भरते हुये चाहे वह दीवारे किसी भी तरह की हो भाईचारे, सहकार और मोहब्बत के पेड़ लगाये और साथ-साथ जीवन में आगे बढ़ें। उन्होने कहा कि इस तीन दिनों तक चलने वाले आयोजन में हिन्दू और मुस्लिम दोनों सम्प्रदायों की बालिकाओं का एक साथ दैनिक हवन, वैदिक मंत्रोपचार एवं भजनों में सहभाग करना हिम्मत एवं साहस का कार्य है। ये बालिकायें निश्चित ही सम्मान की पात्र है।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा ’अब अपने समाज को नमाज के साथ जोड़ें और नमाज को समाज के साथ जोड़े। नमाज मस्जिदों तक ही सीमित न रहे बल्कि नमाज की उस बंदगी का फायदा गंदगी को दूर करने में; समाज को फायदा पहुंचाने में और समाज को गले लगाने में भी हो। उन्होने कहा शरीयत वह है जो हमें शराफत का पाठ पढ़ाती है; जो शराफत से जीना सिखाती है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने तलाक के विषय में कहा कि जिस मातृ शक्ति ने हमें जन्म दिया; उत्पन्न किया जिनकी वजह से आज हम इस संसार में है उन्हें हम क्या दें रहे है। मातृ शक्ति ने हमें केवल पैदा ही नहीं किया बल्कि पालन-पोषण किया; पढ़ाया-लिखाया; हमें गढ़ा, सजाया जिसने हमें सजाया उन्हे हम क्या सजा दें रहे है आज; क्या सम्मान दे रहे आज। उन्होने कहा जिस मातृ शक्ति ने हमें सजाया उन्हे हम तलाक रूपी सजा दे रहे है वह भी गुस्से में आकर; झुंझला कर या वजह कोई भी हो, बस तलाक, तलाक, तलाक और हो गया तलाक नहीं! मुझे लगता है अब तलाक को दे तलाक संकल्प लें तलाक को जीवन से हटायें और सम्मान और प्रेम से जीवन जियें। उन्होने कहा तलाक देना या कहना आसान है परन्तु उस मातृ शक्ति की नारी की पीड़ा को समझना, उसके भविष्य को समझना और उसके भविष्य के बारे में सोचना भी बहुत जरूरी है। साथ ही साथ उनकी निजता और सील के विषय में सोचना, उनके लिये शौचालय बनवाना, स्वच्छता एवं स्वच्छ जल की समस्या का समाधान के विषय में बात करना और समाधान देना ही हमारा लक्ष्य हो क्योंकि महिलाओं को ही सबसे अधिक इन समस्याओं सामना करना पड़ता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वेदों की चर्चा के साथ शौचालय, स्वच्छ जल और स्वच्छता जैसे विषयों पर भी सभी का ध्यान आकर्षित करते हुये कहा कि हमारे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन की पूर्णाहुति सामाजिक समस्याओं के समाधान का संदेश भी प्रसारित हो तो और भी बेहतर होगा।

विश्व वेद सम्मेलन में आज के मुख्य वक्ता जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, मौलाना ए आर साहिन काजमी, राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन, सूर्दशन जुगेसुर, ग्लेन मार्टिन, आरिफ मोहम्मद खान पूर्व कैबिनेट, विश्व संविधान और संसदीय संघ के अध्यक्ष आचार्य नर्देव जी, डाॅ ग्लेन टी मार्टिन और उनकी सलाहकार टीम, श्री रामानुज मिशन ट्रस्ट चेन्नई के स्वामी चतुर्वेदी जी, विश्व शान्ति विश्वविद्यालय एवं एम आई टी पुणे के चांसलर डाॅ विश्वनाथ कराड, डाॅ सी राजकुमार, जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, सोनपत, वैदिक विज्ञान अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष, डाॅ पी वी एन मूर्ति, वैज्ञानिक एवं नांलदा विश्वविद्यालय के कुलपति, डाॅ विजय पी। धर्मगुरूओं मेें आचार्य विवेक मुनीजी, भिक्खु संघसेना जी, डाॅ बिन्नी सरेन जी एवं अनेक आध्यात्म जगत के पूज्य संतों, शिक्षाविद् एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय विश्व वेद सम्मेलन का संयोजन डाॅ आनन्द कुमार पूर्व आईपीएस द्वारा किया गया।