अदालत के आदेश के बाद सरकारी बंगला खाली कर रहे हैं दिग्विजय सिंह

भोपाल। अदालत के आदेश पर अमल करते हुए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा भोपाल में आवंटित बंगला खाली कर रहे हैं। सिंह ने फोन पर कहा, ‘‘अदालत के फैसले के चलते मैंने सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर आवंटित सरकारी बंगला खाली करने का निर्णय लिया है। अदालत के निर्णय का सबको पालन करना चाहिये।’’ प्रदेश सरकार से इसी बंगले के पुन: आवंटन के लिये आवेदन नहीं करने के सवाल पर सिंह ने कहा, ‘‘मैंने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर मेरे आधिकारिक स्टाफ के लिये स्थान आवंटित करने के लिये कहा है।’’

न्यायालय के आदेश पर क्या आप अन्य मुख्यमंत्रियों से भी उन्हें आवंटित बंगले खाली करने की अपेक्षा करते हैं, के सवाल पर सिंह ने कहा, ‘‘मेरी किसी से कोई अपेक्षा नहीं है।’’सिंह के करीबी व्यक्ति ने बताया कि कल से बंगला खाली करने का काम शुरू हो चुका है और उनकी (दिग्विजय) व्यक्तिगत चीजें उनके पैतृक निवास गुना जिले के राधौगढ़ में भेजी गई हैं। सिंह, राधौगढ़ रियासत के पूर्व शासकों के वंश से हैं। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें आधिकारिक तौर पर 14 कर्मचारियों का स्टाफ दिया गया है।
दरअसल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 19 जून को प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के शासकीय बंगले खाली कराने का आदेश दिया था। जिसके बाद सरकार ने भी आदेश जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले का आवंटन निरस्त कर दिया था। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने विशेषाधिकार के तहत नए आदेश जारी कर भाजपा के तीनों पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, उमा भारती और बाबूलाल गौर को बंगले खाली करने से पहले ही पुनः वही बंगले नई श्रेणी में आवंटित कर दिए लेकिन दिग्विजय को बंगला आवंटन नहीं किया गया।